इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘विवेकानन्द साहित्य’ के विशाल संग्रह का छठा खंड है। इस श्रृंखला में स्वामी विवेकानंद के संपूर्ण लेखन, भाषणों और पत्रों को संकलित किया गया है। यह छठा खंड भी उनके ओजस्वी और प्रेरणादायक विचारों से परिपूर्ण है, जिसमें उन्होंने वेदांत के संदेश को व्यावहारिक रूप देने, धर्मों के बीच सामंजस्य स्थापित करने और भारत के युवाओं को आत्म-गौरव के साथ जागृत होने का आह्वान किया है। यह खंड भी पाठकों में एक नई ऊर्जा और दिशा का संचार करता है।
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