इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘विवेकानन्द साहित्य’ के विशाल संग्रह का पहला खंड है। यह श्रृंखला स्वामी विवेकानंद के संपूर्ण लेखन, भाषणों, और पत्रों को संकलित करती है, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन में क्रांति ला सकते हैं। इस प्रथम खंड से ही पाठक स्वामीजी के ओजस्वी विचारों, उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस के प्रति उनकी भक्ति, और भारत के उत्थान के लिए उनके सपनों से परिचित होते हैं। यह आत्म-विश्वास, निडरता और मानव-सेवा की प्रेरणा देने वाले एक ज्ञान-यज्ञ का शुभारंभ है।
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