इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महान दार्शनिक ग्रंथ ‘योगवासिष्ठ’ का हिंदी भाषा में अनुवाद या सरल व्याख्या का दूसरा भाग है। मूल ग्रंथ संस्कृत में है और अद्वैत वेदांत के गूढ़ सिद्धांतों को प्रस्तुत करता है। इस भाषा-टीका का उद्देश्य संस्कृत न जानने वाले सामान्य पाठकों तक इस ज्ञान को पहुँचाना है। इस भाग में गुरु वशिष्ठ और श्री राम के बीच चल रहे संवाद को आगे बढ़ाया गया है, जिसमें मन की प्रकृति, इच्छाओं का त्याग, और संसार के मिथ्यात्व पर गहन चर्चा की गई है। यह आत्म-ज्ञान के जिज्ञासुओं के लिए एक अनमोल कृति है।
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