इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित महान अद्वैत वेदांत ग्रंथ ‘योगवासिष्ठ’ का चौथा भाग है। इस ग्रंथ में गुरु वशिष्ठ और भगवान राम के बीच हुए संवाद के माध्यम से ज्ञान, वैराग्य, सृष्टि की उत्पत्ति, मन का स्वरूप और मोक्ष प्राप्ति के उपायों का विस्तृत वर्णन है। यह भाग कथा को आगे बढ़ाता है और अस्तित्व, चेतना तथा वास्तविकता की प्रकृति पर गहन दार्शनिक चर्चा प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ साधकों को भ्रम और दुःख से मुक्ति दिलाकर परम सत्य का अनुभव कराने का मार्ग दिखाता है।
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