इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“न्याय-कुसुमाञ्जलिः” भारतीय दर्शन के न्याय-वैशेषिक संप्रदाय का एक मील का पत्थर है, जिसकी रचना महान तार्किक उदयनाचार्य ने की है। इस ग्रंथ का मुख्य उद्देश्य तर्कों के माध्यम से ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करना है। ‘कुसुमांजलि’ का अर्थ है ‘पुष्पांजलि’, और इसमें लेखक ने तर्कों के फूलों से ईश्वर की आराधना की है। उदयनाचार्य ने बौद्ध और चार्वाक जैसे अनीश्वरवादी दर्शनों के मतों का खंडन करते हुए, सृष्टि की कार्यात्मकता, वेदों के प्रमाण, और कर्म-फल व्यवस्था जैसे आधारों पर ईश्वर की सत्ता को स्थापित करने के लिए अकाट्य तर्क प्रस्तुत किए हैं। यह भारतीय आस्तिक दर्शन का एक शिखर ग्रंथ है।
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