इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“श्रीरामस्तवराज” भगवान श्री राम की स्तुति में रचा गया एक श्रेष्ठ स्तोत्र है, जिसे ‘स्तोत्रों का राजा’ कहा जाता है। यह पुस्तक उस स्तोत्र पर लिखा गया एक ‘भाष्यम्’ या टीका है। भाष्य का उद्देश्य मूल स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक में निहित गहरे अर्थों, दार्शनिक संकेतों और भक्तिपूर्ण भावों को स्पष्ट करना है। भाष्यकार ने संभवतः रामायण के प्रसंगों और वेदांत के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए यह समझाया होगा कि कैसे प्रत्येक श्लोक श्री राम के परब्रह्म स्वरूप और उनके कल्याणकारी गुणों का गुणगान करता है। यह श्री राम के भक्तों के लिए उनके आराध्य की महिमा को और भी गहराई से समझने और अनुभव करने का एक उत्तम साधन है।
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