इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक महाभारत के अनुशासन पर्व में वर्णित “श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र” का एक गहन विवेचन या भाष्य है। “विष्णु सहस्रनाम” में भगवान विष्णु के एक हजार नामों का संग्रह है, और प्रत्येक नाम उनके एक गुण, लीला या स्वरूप का प्रतीक है। ‘सहस्रधारा’ शीर्षक यह संकेत देता है कि यह पुस्तक ज्ञान की हजारों धाराओं की तरह प्रत्येक नाम के गहरे अर्थ, उनके पौराणिक संदर्भों और उनके दार्शनिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालती है। यह केवल एक स्तोत्र का अनुवाद नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अध्ययन है जो पाठकों को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और उनकी महिमा को समझने में मदद करता है।
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