इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक आलोचनात्मक और तुलनात्मक साहित्यिक अध्ययन है, जो संस्कृत साहित्य के दो शीर्षस्थ कवियों – कालिदास और भवभूति – की रचनाओं में चित्रित नारी पात्रों पर केंद्रित है। इसमें लेखक ने कालिदास की शकुंतला, सीता, और पार्वती तथा भवभूति की सीता और मालती जैसे पात्रों के चरित्र का मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया होगा। पुस्तक में दोनों कवियों के नारी-चित्रण में समानताओं और विभिन्नताओं को उजागर किया गया होगा, जैसे – कालिदास के पात्रों में सौंदर्य और कोमलता की प्रधानता, जबकि भवभूति के पात्रों में तेजस्विता और दृढ़ता का चित्रण। यह संस्कृत नाटक और काव्य में नारी की अवधारणा को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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