इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“अलंकारस्य ईश-काव्यम्” एक संस्कृत कृति है जिसका शीर्षक थोड़ा असामान्य है और इसकी व्याख्या कई तरह से हो सकती है। एक संभावना है कि यह ‘अलंकार’ नामक किसी कवि द्वारा रचित ‘ईश-काव्य’ (ईश्वर पर काव्य) है। दूसरी संभावना, जो अधिक काव्यशास्त्रीय है, यह है कि यह एक ऐसा काव्य है जिसमें ‘अलंकार’ ही ‘ईश’ या प्रमुख है, यानी यह अलंकारों (जैसे- उपमा, रूपक) की छटा दिखाने के लिए ही रचा गया एक प्रदर्शन-काव्य हो सकता है। यह भी संभव है कि यह अलंकार शास्त्र पर ही एक काव्यात्मक ग्रंथ हो। बिना अतिरिक्त संदर्भ के, यह एक ऐसी साहित्यिक कृति प्रतीत होती है जो ईश्वर-भक्ति और काव्य-अलंकरण के मेल पर केंद्रित है।
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