इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक महाभारत में वर्णित “श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र” पर एक ‘चिन्तनिका’ अर्थात् एक चिंतनपूर्ण विवेचना है। यह केवल एक भाष्य या टीका नहीं, बल्कि प्रत्येक नाम पर गहराई से मनन और ध्यान करने का एक प्रयास है। इसमें लेखक ने भगवान विष्णु के प्रत्येक नाम के आध्यात्मिक, दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थों पर अपने विचार प्रस्तुत किए होंगे। इसका उद्देश्य पाठकों को केवल स्तोत्र का पाठ करने तक ही सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें प्रत्येक नाम के पीछे छिपे अनंत ज्ञान और शक्ति पर चिंतन करने के लिए प्रेरित करना है। यह साधकों के लिए नाम-जप की साधना को और अधिक गहरा और अर्थपूर्ण बनाने में मदद करती है।
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