इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“तेवरी पक्ष” हिंदी साहित्य में ‘तेवरी’ नामक एक विशेष काव्य-विधा को समर्पित पत्रिका या प्रकाशन का नाम हो सकता है। ‘तेवरी’ एक आक्रामक और व्यंग्यात्मक शैली की कविता होती है, जो सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों, भ्रष्टाचार और अन्याय पर सीधा और जोरदार प्रहार करती है। ‘1687’ की तिथि स्पष्ट रूप से एक मुद्रण त्रुटि है, यह संभवतः 1987 होगा। यह अप्रैल-जून का अंक उस दौर की राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं पर कवियों की तीखी प्रतिक्रियाओं को प्रस्तुत करता होगा। यह पत्रिका हिंदी कविता की एक विद्रोही और जनवादी धारा का प्रतिनिधित्व करती है, जो शोषित और पीड़ित वर्ग की आवाज़ बनती है।
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