इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“वैदिक धर्म” किसी आर्य समाजी या वैदिक परंपरा को समर्पित संस्था द्वारा प्रकाशित पत्रिका का नाम प्रतीत होता है। यह उसका फरवरी 1952 का अंक है। इस पत्रिका का मुख्य उद्देश्य वेदों के मूल संदेश, एकेश्वरवाद, और वैदिक जीवन-पद्धति का प्रचार-प्रसार करना तथा समाज में व्याप्त पाखंड और अंधविश्वासों का खंडन करना होगा। इस अंक में वेदों के किसी मंत्र की व्याख्या, किसी सामाजिक या धार्मिक मुद्दे पर वैदिक दृष्टिकोण, और आर्य समाज के इतिहास या उसके नेताओं के जीवन पर लेख शामिल हो सकते हैं। यह उस समय के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और वैचारिक बहसों को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
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