इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह शीर्षक संभवतः तेलुगु साहित्य के युगांतकारी नाटक “कन्याशुल्कम्” (दहेज) का हिंदी अनुवाद या उस पर आधारित कोई कृति है, जिसकी रचना गुरुजाडा अप्पाराव ने 19वीं सदी के अंत में की थी। यह नाटक उस समय आंध्र समाज में व्याप्त बाल-विवाह और ‘कन्याशुल्कम्’ (लड़की के पिता द्वारा वर पक्ष से पैसे लेने की प्रथा) जैसी सामाजिक कुरीतियों पर एक शक्तिशाली व्यंग्य है। अपने जीवंत पात्रों, यथार्थवादी संवादों और प्रगतिशील संदेश के कारण इसे आधुनिक तेलुगु साहित्य का एक मील का पत्थर माना जाता है। यह कृति सामाजिक सुधार के एक शक्तिशाली हथियार के रूप में साहित्य की भूमिका का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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