इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह “सुत्त पिटक” के पांच निकायों में से एक, “संयुत्त निकाय” का पालि मूल पाठ और उसका हिंदी अनुवाद प्रस्तुत करने वाली एक महत्वपूर्ण श्रृंखला का पहला भाग है। ‘संयुत्त’ का अर्थ है ‘संयुक्त’ या ‘समूहबद्ध’। इस निकाय की विशेषता यह है कि इसमें भगवान बुद्ध के उपदेशों को विषय-वस्तु के अनुसार विभिन्न समूहों (संयुत्तों) में वर्गीकृत किया गया है, जैसे- देवताओं पर, आर्य सत्य पर, या ध्यान की अवस्थाओं पर। यह संस्करण ‘संहिता’ के रूप में है, जिसका अर्थ है कि इसमें मूल पालि पाठ के साथ उसका प्रामाणिक हिंदी अनुवाद भी दिया गया है, जो बौद्ध धर्म के गंभीर अध्येताओं और शोधकर्ताओं के लिए बुद्ध के मूल वचनों को सीधे समझने का एक अमूल्य स्रोत है।
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