इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“गायत्रीमन्त्रार्थभास्करः” का अर्थ है “गायत्री मंत्र के अर्थ का सूर्य”। यह ग्रंथ हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण मंत्र, गायत्री मंत्र, पर एक विस्तृत और गहन भाष्य या टीका है। ‘भास्कर’ (सूर्य) की तरह, यह पुस्तक मंत्र के प्रत्येक शब्द के शाब्दिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक अर्थ पर प्रकाश डालती है और उससे जुड़े अज्ञान के अंधकार को दूर करती है। इसमें मंत्र के देवता (सविता), उसके छंद, और उसके ऋषि का महत्व समझाया गया होगा। यह केवल एक व्याख्या नहीं, बल्कि एक साधना-ग्रंथ भी हो सकता है, जिसमें मंत्र के जाप की विधि और उससे प्राप्त होने वाले शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों की विस्तृत चर्चा की गई हो।
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