इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक ‘महाकाव्य’ है जो दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तीर्थ-स्थल रामेश्वरम की महिमा और उसके महात्म्य पर केंद्रित है। रामेश्वरम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी स्थापना स्वयं भगवान राम ने रावण पर विजय के बाद की थी। इस महाकाव्य में संभवतः रामेश्वरम के पौराणिक इतिहास, सेतु-बंधन की कथा, शिवलिंग की स्थापना, और इस तीर्थ की स्थापत्य कला का विस्तृत और काव्यात्मक वर्णन किया गया होगा। यह शैव और वैष्णव परंपराओं के संगम का भी प्रतीक है। यह महाकाव्य न केवल एक स्थान का गुणगान है, बल्कि भारतीय संस्कृति में धर्म, इतिहास और भूगोल के गहरे जुड़ाव का एक साहित्यिक उत्सव है।
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