इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“विधानपारिजात” धर्मशास्त्र का एक महत्वपूर्ण और विस्तृत ‘निबंध-ग्रंथ’ है, जिसकी रचना अनंतदेव ने की थी। ‘पारिजात’ स्वर्ग के उस दिव्य वृक्ष का नाम है जो सभी इच्छाओं को पूरा करता है; उसी प्रकार यह ग्रंथ धर्म-संबंधी सभी प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत करने का दावा करता है। यह एक विश्वकोशीय कृति है जो हिंदू जीवन के सभी पहलुओं, जैसे- संस्कार, आचार, श्राद्ध, और प्रायश्चित, पर विभिन्न स्मृतियों, पुराणों और अन्य धर्मशास्त्रीय ग्रंथों के मतों को संकलित और व्यवस्थित करती है। यह प्रथम खंड, उस विशाल ग्रंथ की शुरुआत है, जो संभवतः ‘आचार’ (दैनिक कर्तव्य) या ‘संस्कार’ जैसे विषयों से प्रारंभ होता है।
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