इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक सिख धर्म के मूल मंत्र “नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला” पर आधारित एक आध्यात्मिक कृति है। इसका केंद्रीय भाव है गुरु नानक देव जी के नाम (नाम सिमरन) के जाप से ‘चढ़दी कला’ अर्थात् एक निरंतर सकारात्मक और आशावादी மனோநிலை प्राप्त करना। पुस्तक में यह समझाया गया होगा कि कैसे ईश्वर की इच्छा (‘तेरे भाणे’) को स्वीकार कर और सभी के भले (‘सरबत दा भला’) की कामना करके व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकता है। इसमें गुरु नानक की शिक्षाओं, साखियों और सबदों के माध्यम से पाठकों को आध्यात्मिक शांति, निडरता और हर हाल में प्रसन्न रहने का मार्ग दिखाया गया होगा।
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