इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार भीष्म साहनी के यथार्थवादी उपन्यास “वासंती” का दूसरा भाग है। यह उपन्यास दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाली वासंती नामक एक किशोरी की मार्मिक कहानी है। पिता द्वारा बेच दिए जाने के बाद, वह शोषण और गरीबी के चक्र में फँस जाती है, लेकिन वह हार नहीं मानती। इस दूसरे भाग में संभवतः उसके संघर्ष की कहानी आगे बढ़ती है, जहाँ वह अपनी गरिमा और अस्तित्व को बचाने के लिए सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करती है। भीष्म साहनी ने इस उपन्यास में शहरी गरीबों के जीवन की कठोर सच्चाइयों और एक युवा लड़की के अदम्य साहस का अत्यंत संवेदनशील और यथार्थवादी चित्रण किया है।
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