इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक दार्शनिक और आध्यात्मिक पुस्तक है, जो सार्वभौमिक भाईचारे और एकता के सिद्धांत पर आधारित है। शीर्षक यह दर्शाता है कि इस दुनिया में वास्तव में ‘कोई अनजाना या बेगाना’ नहीं है; हम सभी एक ही चेतना या एक ही मानव परिवार का हिस्सा हैं। पुस्तक में विभिन्न धर्मों और आध्यात्मिक परंपराओं (जैसे- वेदांत का ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’) के उद्धरण हो सकते हैं जो इस विचार का समर्थन करते हैं। इसका उद्देश्य पाठकों को संकीर्ण पहचानों (जैसे- जाति, धर्म, राष्ट्र) से ऊपर उठकर सभी प्राणियों के प्रति प्रेम, करुणा और अपनेपन की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित करना है।
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