इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
आराधना’ आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण जैन ग्रंथ है, जो मोक्ष मार्ग पर चलने वाले साधकों के लिए एक मार्गदर्शिका है। इस ग्रंथ में सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र, जिन्हें ‘रत्नत्रय’ कहा जाता है, की आराधना और साधना पर जोर दिया गया है। यह सिखाता है कि कैसे एक साधक आत्म-अनुशासन, तपस्या और ध्यान के माध्यम से कर्मों के बंधन को नष्ट कर सकता है और आत्म-सिद्धि प्राप्त कर सकता है। यह जैन धर्म के आध्यात्मिक सिद्धांतों को समझने के लिए एक गहन और पूजनीय रचना है।
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