इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
जैन धर्म के संदर्भ में, ‘ग्यारह प्रतिमाएँ’ श्रावक (गृहस्थ) के आध्यात्मिक विकास के ग्यारह चरणों का वर्णन करने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। प्रत्येक ‘प्रतिमा’ एक व्रत या नियम है, जिसका पालन करते हुए श्रावक धीरे-धीरे अपनी आसक्तियों और सांसारिक बंधनों को कम करता है और मुनि-जीवन के करीब पहुँचता है। यह पुस्तक इन ग्यारह प्रतिमाओं के स्वरूप, उनके पालन की विधि और उनके महत्व की विस्तृत व्याख्या करती है। यह जैन गृहस्थों के लिए आत्म-अनुशासन और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है।
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