इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक गहन आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक जैन ग्रंथ है जो ‘भाव’ अर्थात आत्मा के विभिन्न परिणामों या मानसिक अवस्थाओं की ‘आनुपूर्वी’ यानी क्रमबद्ध श्रृंखला का विश्लेषण करता है। इसमें क्रोध, मान, माया, लोभ जैसी नकारात्मक भावनाओं से लेकर क्षमा, नम्रता और शांति जैसी सकारात्मक अवस्थाओं तक के संक्रमण और उनके प्रभावों की सूक्ष्म विवेचना की गई है। यह पुस्तक साधकों को अपने आंतरिक भावों को समझने, उन्हें नियंत्रित करने और आध्यात्मिक शुद्धि की ओर बढ़ने के लिए एक मार्गदर्शिका प्रदान करती है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।