इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक नाटक है जो भगवान महावीर की समकालीन एक महान सती, चंदनबाला (या चंदना) के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित है। कहानी में उनके एक राजकुमारी से दासी बनने, अनेक कष्टों को सहने और फिर भी अपनी पवित्रता और धर्म पर दृढ़ रहने का मार्मिक चित्रण है। यह नाटक दिखाता है कि कैसे उन्होंने अपने अटूट विश्वास के बल पर भगवान महावीर को आहार देकर दीक्षा ली और जैन संघ की पहली साध्वी बनीं। यह त्याग, करुणा और नारी शक्ति की एक प्रेरक गाथा है।
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