इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म में महत्वपूर्ण माने जाने वाले ‘पैंतीस बोल’ का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। ‘बोल’ का अर्थ है सिद्धांत या सूत्र। यह पैंतीस सूत्रों का एक संग्रह है जिसमें जैन धर्म के विभिन्न पहलुओं जैसे श्रावक के व्रत, साधु के गुण, और अन्य नैतिक-आध्यात्मिक नियमों का सार है। यह विवरण प्रत्येक ‘बोल’ का अर्थ, उसकी महत्ता और उसे व्यावहारिक जीवन में कैसे उतारा जाए, इस पर प्रकाश डालता है। यह जैन धर्म की शिक्षाओं को कंठस्थ करने और समझने का एक पारंपरिक तरीका है।
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