इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म के ‘तीर्थंकरों’ के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर केंद्रित है। इसमें जैन धर्म के चौबीस तीर्थंकरों की परंपरा, उनके जीवन के पंचकल्याणकों (गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान, मोक्ष) और उनके द्वारा दिए गए सार्वभौमिक संदेशों का वर्णन किया गया है। यह कृति बताती है कि कैसे इन महापुरुषों ने आत्म-साधना के माध्यम से सर्वोच्च ज्ञान प्राप्त किया और दुनिया को दुःख से मुक्ति का मार्ग दिखाया। यह जैन धर्म की मूल अवधारणाओं को समझने के लिए एक श्रद्धापूर्ण और ज्ञानवर्धक ग्रंथ है।
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