इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महाकवि हरिचन्द्र द्वारा रचित एक उत्कृष्ट संस्कृत महाकाव्य है। इस महाकाव्य में जैन धर्म के पंद्रहवें तीर्थंकर, भगवान ‘धर्मनाथ’ के जीवन चरित्र (‘अभ्युदय’) का वर्णन है। यह अपनी अलंकृत और परिष्कृत काव्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। इसमें तीर्थंकर के पंचकल्याणकों का सुंदर चित्रण है और यह संस्कृत साहित्य की शास्त्रीय महाकाव्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो भक्ति और काव्य का अद्भुत संगम है।
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