इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
श्रावकाचार’ उन ग्रंथों को कहते हैं जिनमें जैन श्रावकों (गृहस्थों) के आचार-नियमों का वर्णन होता है। यह पुस्तक इसी विषय पर आधारित किसी विस्तृत ग्रंथ का पहला भाग है। इसमें एक गृहस्थ के लिए आवश्यक दैनिक कर्तव्यों, अणुव्रतों, गुणव्रतों और शिक्षाव्रतों का विस्तार से वर्णन है। इसका उद्देश्य जैन गृहस्थों को एक अनुशासित, नैतिक और धार्मिक जीवन जीने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना है, ताकि वे अपने सांसारिक दायित्वों को निभाते हुए भी आध्यात्मिक उन्नति कर सकें।
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