इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक अकादमिक शोध-प्रबंध है। इसमें दो प्रमुख धर्मशास्त्रकारों, ‘मनु’ (मनुस्मृति में) और ‘याज्ञवल्क्य’ (याज्ञवल्क्य स्मृति में) द्वारा वर्णित ‘वर्ण-व्यवस्थाओं’ का ‘तुलनात्मक अध्ययन’ किया गया है। इसके अलावा, यह शोध आज के आधुनिक समाज में इस व्यवस्था की ‘प्रासंगिकता’ पर भी विचार करता है। यह हिंदू सामाजिक संरचना के ऐतिहासिक आधार और उसकी समकालीन बहसों पर एक गंभीर समाजशास्त्रीय और कानूनी अध्ययन है।
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