इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 11वीं सदी में कृष्ण मिश्र द्वारा रचित एक अनूठा और प्रसिद्ध संस्कृत ‘प्रतीकात्मक’ नाटक है। ‘प्रबोधचन्द्रोदयम्’ का अर्थ है ‘विवेक रूपी चंद्रमा का उदय’। इस नाटक के पात्र मानवीय गुण और अवगुण हैं, जैसे मोह, काम, विवेक, और श्रद्धा। यह अद्वैत वेदांत के दर्शन को एक नाटकीय रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें विवेक और महामोह के बीच संघर्ष और अंत में विवेक की विजय दिखाई गई है, जिससे आत्म-ज्ञान का उदय होता है।
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