इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘मुहावरों’ पर एक ‘मीमांसा’ अर्थात गहन और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। यह केवल मुहावरों का एक संग्रह नहीं है, बल्कि यह उनकी उत्पत्ति, उनके सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, और भाषा में उनके महत्व की पड़ताल करती है। इसमें यह विश्लेषण किया गया है कि मुहावरे कैसे बनते हैं और वे कैसे किसी समाज के अनुभव और ज्ञान को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करते हैं। यह हिंदी भाषा और लोक-संस्कृति का एक रोचक अध्ययन है।
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