इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नगेन्द्र द्वारा लिखी गई एक महत्वपूर्ण साहित्यिक आलोचना की पुस्तक है। इसके दो भाग हैं: पहला भाग ‘रीति काव्य की भूमिका’ है, जिसमें वे हिंदी साहित्य के रीतिकाल की प्रवृत्तियों, उसकी सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और उसके महत्व का विश्लेषण करते हैं। दूसरा भाग रीतिकाल के प्रमुख कवि ‘देव’ और उनकी कविता पर एक गहन और विस्तृत अध्ययन है, जिसमें वे देव की काव्य-कला और उनके योगदान का मूल्यांकन करते हैं।
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