इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह आचार्य अमितगति द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण जैन ग्रंथ है, जो ‘श्रावकाचार’ अर्थात जैन गृहस्थ के आचरण पर केंद्रित है। संस्कृत श्लोकों में रचित इस ग्रंथ में सम्यक दर्शन, बारह व्रतों, और एक जैन श्रावक के दैनिक कर्तव्यों का व्यवस्थित रूप से वर्णन किया गया है। यह अपनी स्पष्ट और सुंदर काव्य शैली के लिए जाना जाता है। यह पुस्तक संभवतः मूल ग्रंथ का हिंदी अनुवाद और व्याख्या प्रस्तुत करती है, जो इसे आम पाठकों के लिए सुलभ बनाती है।
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