इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘कातन्त्र व्याकरण’ पर एक ग्रंथ है, जो संस्कृत व्याकरण की एक प्राचीन, सरल और संक्षिप्त प्रणाली है। माना जाता है कि इसकी रचना शर्ववर्मा ने सातवाहन राजा को शीघ्र संस्कृत सिखाने के लिए की थी। पाणिनि की अष्टाध्यायी की तुलना में इसके नियम बहुत सरल हैं। यह अपनी सरलता के कारण मध्यकाल में बहुत लोकप्रिय हुआ, विशेषकर बंगाल और कश्मीर में। यह पुस्तक इस व्याकरणिक प्रणाली के सूत्रों और उनकी व्याख्या को प्रस्तुत करती है।
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