इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 5वीं सदी के कवि विमलसूरि द्वारा अपभ्रंश भाषा में लिखा गया जैन ‘रामायण’ है। ‘पउमचरिउ’ का अर्थ है ‘पद्म (राम) का चरित्र’। इसमें राम, सीता और रावण की कथा को जैन सिद्धांतों और मूल्यों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। इसमें रावण को एक खलनायक के बजाय एक महान और悲극적 (दुखद) प्रति-नायक के रूप में चित्रित किया गया है और अहिंसा पर बहुत जोर दिया गया है। यह भारतीय रामायण परंपरा का एक महत्वपूर्ण और अनूठा संस्करण है।
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