इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय’ का सत्ताइसवाँ खंड है, जो महात्मा गांधी के लेखन और भाषणों का एक प्रामाणिक संग्रह है। यह खंड 1925 के मध्य की अवधि को कवर करता है, जब गांधीजी ने अपनी राजनीतिक गतिविधियों को कम कर दिया था और अपना ध्यान रचनात्मक कार्यों, विशेष रूप से चरखा और खादी के प्रचार पर केंद्रित किया था। इसमें उनके ‘यंग इंडिया’ और ‘नवजीवन’ में लिखे गए लेख शामिल हैं, जो उनकी आर्थिक और सामाजिक आत्मनिर्भरता की दृष्टि को दर्शाते हैं।
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