इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘विश्वभारती पत्रिका’ का सातवाँ खंड, अंक चार है। यह पत्रिका रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्वभारती विश्वविद्यालय से जुड़ी एक प्रतिष्ठित अकादमिक और साहित्यिक पत्रिका है। इसमें साहित्य, दर्शन, कला और संस्कृति पर उच्च स्तरीय विद्वत्तापूर्ण लेख, शोध-पत्र और समीक्षाएं प्रकाशित होती हैं। यह अंक उस समय के बौद्धिक और साहित्यिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है और टैगोर की बहुसांस्कृतिक और मानवतावादी दृष्टि को दर्शाता है।
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