इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह संभवतः एक प्राचीन जैन ग्रंथ है, जिसमें दो अलग-अलग प्रकरण या अध्याय शामिल हैं। पहला, ‘धर्मसर्वस्वाधिकार’, धर्म के सभी पहलुओं पर अधिकारपूर्ण विवेचन प्रस्तुत कर सकता है, जिसमें श्रावक और मुनि के आचार-नियमों का वर्णन हो। दूसरा, ‘कस्तूरी प्रकरण’, किसी रूपक कथा या दृष्टांत (जैसे कस्तूरी मृग) के माध्यम से किसी नैतिक या आध्यात्मिक सिद्धांत को समझा सकता है। यह जैन साहित्य की शास्त्रीय परंपरा का एक उदाहरण है।
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