इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म की ‘श्वेतांबर’ परंपरा के मतों और सिद्धांतों की एक ‘समीक्षा’ या आलोचना प्रस्तुत करती है। यह संभवतः दिगंबर परंपरा के किसी विद्वान द्वारा लिखी गई है, जिसमें उन्होंने श्वेतांबर मान्यताओं (जैसे- स्त्री-मुक्ति, केवली-कवलाहार) पर अपने तर्कों और शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर प्रश्न उठाए हैं। यह जैन धर्म के भीतर के सैद्धांतिक शास्त्रार्थों और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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