इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
पउमचरिउ’ (पद्मचरित) अपभ्रंश भाषा के महाकवि स्वयंभू द्वारा रचित एक विशाल महाकाव्य है, जो रामकथा का जैन संस्करण प्रस्तुत करता है। ‘पद्म’ श्री राम का ही एक नाम है। यह पुस्तक इसी महाकाव्य का तीसरा भाग है, जिसमें मूल अपभ्रंश पाठ के साथ उसका हिंदी अनुवाद और विवेचन प्रस्तुत किया गया है। यह कृति न केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि अपभ्रंश साहित्य और भाषा के अध्ययन के लिए भी एक अमूल्य स्रोत है।
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