इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक तुलनात्मक भाषा-विज्ञान पर आधारित एक विद्वत्तापूर्ण ग्रंथ है। इसमें दो प्राचीन और सहोदर भाषाओं – वैदिक ‘संस्कृत’ और पारसी धर्म-ग्रंथ की भाषा ‘अवेस्ता’ – के बीच की समानताओं का अध्ययन किया गया है। यह पुस्तक दोनों भाषाओं की ध्वनि-प्रणाली, व्याकरण और शब्दावली का तुलनात्मक विश्लेषण कर यह दर्शाती है कि वे एक ही मूल आर्य-भाषा से निकली हैं। यह ऐतिहासिक भाषा-विज्ञान के अध्येताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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