इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
अपराजितेश्वर शतक’ संभवतः ‘अपराजित ईश्वर’ (जिन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता, जैसे कि भगवान जिनेन्द्र) की स्तुति में रचे गए सौ श्लोकों (‘शतक’) का एक संग्रह है। रत्नाकर कवि की यह कृति भक्ति-रस और काव्य-कला का एक सुंदर उदाहरण हो सकती है, जिसमें कवि ने अपने आराध्य की महिमा, उनके गुणों और उनके प्रति अपनी भक्ति-भावना को कलात्मक ढंग से व्यक्त किया है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।