इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
जिनराज भक्ति आदर्श’ का अर्थ है ‘जिनेन्द्र भगवान की भक्ति का आदर्श’। यह एक ऐसी पुस्तक है जो जैन धर्म में भक्ति के आदर्श स्वरूप को प्रस्तुत करती है। इसमें स्तुतियों, भजनों, या लेखों के माध्यम से यह समझाया गया हो सकता है कि सच्ची भक्ति क्या है और एक श्रावक को किस प्रकार अपने आराध्य तीर्थंकर के प्रति भक्ति-भाव रखना चाहिए। यह कृति पाठकों को आडम्बर रहित और सच्ची भक्ति के लिए प्रेरित करती है।
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