इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
त्रीणि छेदसूत्राणि’ का अर्थ है ‘तीन छेदसूत्र’। यह श्वेतांबर जैन आगम साहित्य के एक महत्वपूर्ण विभाग ‘छेदसूत्रों’ में से तीन प्रमुख सूत्रों का एक संग्रह है। छेदसूत्र मुख्य रूप से जैन साधु-साध्वियों के आचार, नियमों के उल्लंघन पर प्रायश्चित, और संघ की व्यवस्था से संबंधित हैं। इस संग्रह में संभवतः दशाश्रुतस्कंध, बृहत्कल्प और व्यवहार जैसे सूत्र शामिल हैं, जो साधु-जीवन के अनुशासन का विस्तृत विधान प्रस्तुत करते हैं।
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