इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह छायावाद के प्रवर्तक कवि जयशंकर ‘प्रसाद के काव्य’ पर एक गहन आलोचनात्मक अध्ययन है। इस पुस्तक में प्रसाद की कविताओं में निहित दार्शनिक चिंतन (विशेषकर शैव दर्शन), राष्ट्रीय-सांस्कृतिक चेतना, सौंदर्य-बोध, और प्रेम तथा वेदना की सूक्ष्म अभिव्यक्तियों का विश्लेषण किया गया है। यह ‘कामायनी’, ‘आँसू’ और ‘लहर’ जैसी उनकी प्रमुख कृतियों के माध्यम से प्रसाद की काव्य-प्रतिभा के विभिन्न आयामों को उजागर करती है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।