इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह आचार्य विनोबा भावे द्वारा ‘साहित्यिकों से’ किए गए संवादों, भाषणों और लेखों का एक संग्रह है। इसमें विनोबा जी साहित्यकारों का आह्वान करते हैं कि वे अपनी लेखनी का उपयोग केवल कला या मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज के नैतिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए करें। वे साहित्य को सर्वोदय के विचार और लोक-कल्याण से जोड़ने पर बल देते हैं, और उसे सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम बनाने का आग्रह करते हैं।
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