इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘कांजी मत’ का ‘विवेचन’ अर्थात एक आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। ‘कांजी मत’ से तात्पर्य बीसवीं सदी के जैन आध्यात्मिक संत, कांजी स्वामी द्वारा प्रचारित विचारों और शास्त्रों की व्याख्या से है। इस पुस्तक में लेखक ने कांजी स्वामी के मत की पारंपरिक जैन सिद्धांतों और मान्यताओं के साथ तुलना की है और उस पर अपनी समालोचना प्रस्तुत की है। यह बीसवीं सदी के जैन विचार-जगत की एक महत्वपूर्ण बहस को दर्शाती है।
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