इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘जैन पद्य रामायण’ का पहला खंड है। यह रामकथा का जैन संस्करण है, जिसे ‘पद्य’ या कविता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जैन रामायण, जिसे ‘पद्मपुराण’ या ‘पउमचरिउ’ भी कहते हैं, में पात्र और घटनाएँ तो वही हैं, लेकिन उनका चित्रण जैन सिद्धांतों, विशेषकर अहिंसा और कर्म के अनुसार किया गया है। इसमें राम, लक्ष्मण और रावण को 63 शलाकापुरुषों में से माना जाता है।
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