इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 8वीं सदी के जैन आचार्य हरिभद्र सूरि द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण दार्शनिक ग्रंथ है। ‘षड्-दर्शन-समुच्चय’ का अर्थ है ‘छः दर्शनों का संग्रह’। इस संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित कृति में हरिभद्र सूरि ने भारतीय दर्शन के छः प्रमुख निकायों – न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, और वेदांत – के साथ-साथ बौद्ध, जैन, और चार्वाक दर्शन के मूल सिद्धांतों का निष्पक्ष और व्यवस्थित सारांश प्रस्तुत किया है।
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