इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
मय्यषी नदी के किनारे’ संभवतः एक उपन्यास या कहानी संग्रह है, जिसका कथानक मय्यषी (माहे) नदी के तट पर बसे क्षेत्र और वहां के जीवन के इर्द-गिर्द घूमता है। यह कृति एम. मुकुंदन के प्रसिद्ध मलयालम उपन्यास ‘मय्यष़िप्पुष़युडे तीरंगळिल’ का हिंदी अनुवाद हो सकती है, जो माहे (एक पूर्व फ्रांसीसी उपनिवेश) के अद्वितीय इतिहास, संस्कृति और राजनीतिक परिवर्तनों का चित्रण करता है। कहानी पात्रों के व्यक्तिगत जीवन, उनके सपनों, संघर्षों और फ्रांसीसी शासन से भारतीय संघ में विलय के दौरान हुए सामाजिक मंथन को नदी के एक मूक साक्षी के रूप में प्रस्तुत करती है।
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